श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.13.1 
और्व उवाच
सचैलस्य पितु: स्नानं जाते पुत्रे विधीयते।
जातकर्म तदा कुर्याच्छ्राद्धमभ्युदये च यत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
और्व ने कहा—पुत्र के जन्म पर पिता को वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए। तत्पश्चात जातकर्म संस्कार और अभ्युदय श्राद्ध करना चाहिए।॥1॥
 
Aurva said—On the birth of a son, the father should take a bath in his clothes. After that, the Jaatakarma Sanskar and Aabhyudayak Shraddha should be performed.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)