श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.12.9 
न कुर्याद्दन्तसङ्घर्षं कुष्णीयाच्च न नासिकाम्।
नासंवृतमुखो जृम्भेच्छ्वासकासौ विसर्जयेत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दाँत न पीसें, नाक न खुजलाएँ, मुँह बंद करके जम्हाई न लें, और मुँह बंद करके खाँसें या साँस न छोड़ें ॥9॥
 
Do not grind your teeth together, do not scratch your nose, do not yawn with your mouth closed, and do not cough or exhale with your mouth closed. ॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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