| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन » श्लोक 5 |
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| | | | श्लोक 3.12.5  | नान्यस्त्रियं तथा वैरं रोचयेत्पुरुषर्षभ।
न दुष्टं यानमारोहेत्कूलच्छायां न संश्रयेत्॥ ५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे पुरुषश्रेष्ठ! पराई स्त्रियों में कभी रुचि न लो, पर-द्वेष न करो, निंदित वाहन पर कभी न चढ़ो, तथा नदी के तट की छाया में कभी न बैठो। | | | | O best of men! Never take interest in other's women or in enmity towards others, never ride in a vehicle that is condemned and never take shelter in the shade of a river bank. 5. | | ✨ ai-generated | | |
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