श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.12.45 
प्राणिनामुपकाराय यथैवेह परत्र च।
कर्मणा मनसा वाचा तदेव मतिमान्भजेत्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जो कार्य इस लोक और परलोक में प्राणियों के कल्याण के लिए लाभदायक हो, उसे बुद्धिमान पुरुष को मन, वचन और कर्म से करना चाहिए ॥45॥
 
The work which is beneficial for the welfare of the living beings in this world and the next world should be carried out by a wise man through his mind, words and deeds. 45॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd