| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन » श्लोक 40 |
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| | | | श्लोक 3.12.40  | दोषहेतूनशेषांश्च वश्यात्मा यो निरस्यति।
तस्य धर्मार्थकामानां हानिर्नाल्पापि जायते॥ ४०॥ | | | | | | अनुवाद | | जो संयमरूपी दोषों के समस्त कारणों का त्याग कर देता है, उसके धर्म, अर्थ और काम में किंचितमात्र भी हानि नहीं होती ॥40॥ | | | | He who abandons all the causes of the defects of self-control does not suffer even the slightest loss in his Dharma, Artha and Kama. ॥ 40॥ | | ✨ ai-generated | | |
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