किञ्चित्परस्वं न हरेन्नाल्पमप्यप्रियं वदेत्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयान्नान्यदोषानुदीरयेत्॥ ४॥
अनुवाद
किसी का थोड़ा-सा भी धन न चुराएँ और न ही किसी से थोड़ा-सा भी अप्रिय बोलें। कभी भी झूठा मीठा वचन न बोलें और न ही दूसरों के दोष दिखाएँ॥4॥
Do not steal even a little money from anyone and do not speak even a little unpleasantly. Never speak a sweet word that is false and never point out the faults of others.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥