श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.12.4 
किञ्चित्परस्वं न हरेन्नाल्पमप्यप्रियं वदेत्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयान्नान्यदोषानुदीरयेत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
किसी का थोड़ा-सा भी धन न चुराएँ और न ही किसी से थोड़ा-सा भी अप्रिय बोलें। कभी भी झूठा मीठा वचन न बोलें और न ही दूसरों के दोष दिखाएँ॥4॥
 
Do not steal even a little money from anyone and do not speak even a little unpleasantly. Never speak a sweet word that is false and never point out the faults of others.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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