श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.12.39 
नोर्ध्वं न तिर्यग्दूरं वा न पश्यन्पर्यटेद् बुध:।
युगमात्रं महीपृष्ठं नरो गच्छेद्विलोकयन्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह ऊपर, इधर-उधर या दूर की वस्तुओं को देखकर न चले; उसे चार हाथ की दूरी तक केवल पृथ्वी को ही देखता हुआ चलना चाहिए ॥39॥
 
A wise man should not walk looking upwards, here and there or at distant objects; he should walk looking only at the earth for a distance of four hands. ॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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