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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
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श्लोक 28
श्लोक
3.12.28
तिष्ठन्न मूत्रयेत्तद्वत्पथिष्वपि न मूत्रयेत्।
श्लेष्मविण्मूत्ररक्तानि सर्वदैव न लङ्घयेत्॥ २८॥
अनुवाद
खड़े होकर या सड़क पर पेशाब न करें और बलगम (थूक), मल, मूत्र और रक्त को कभी न लांघें । 28॥
Do not urinate while standing or on the road and never cross mucus (spit), feces, urine and blood. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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