vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
»
श्लोक 18
श्लोक
3.12.18
दंष्ट्रिण: शृंगिंणश्चैव प्राज्ञो दूरेण वर्जयेत्।
अवश्यायं च राजेन्द्र पुरोवातातपौ तथा॥ १८॥
अनुवाद
हे राजन! बुद्धिमान पुरुष को अपने सामने आने वाले दाँतों और सींगों वाले पशुओं, ओस, वायु और सूर्य के प्रकाश से सदैव दूर रहना चाहिए।
O King! A wise man should always avoid animals having teeth and horns, dew as well as the wind and sunlight in front of him. 18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×