| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 3.12.11  | न श्मश्रु भक्षयेल्लोष्टं न मृद्नीयाद्विचक्षण:।
ज्योतींष्यमेध्यशस्तानि नाभिवीक्षेत च प्रभो॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | हे प्रभु! बुद्धिमान पुरुष को अपनी मूँछ और दाढ़ी के बाल नहीं चबाने चाहिए, दो बालों को आपस में नहीं रगड़ना चाहिए और अपवित्र एवं निंदित तारों को नहीं देखना चाहिए। 11॥ | | | | Oh, Lord! A wise man should not chew the hair of his mustache and beard, should not rub two hairs together and should not look at the impure and condemned stars. 11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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