श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.12.1 
और्व उवाच
देवगोब्राह्मणान्सिद्धान्वृद्धाचार्यांस्तथार्चयेत्।
द्विकालं च नमेत्सन्ध्यामग्नीनुपचरेत्तथा॥ १॥
 
 
अनुवाद
और्व बोले - गृहस्थ को प्रतिदिन देवता, गौ, ब्राह्मण, सिद्धगण, वृद्धजन और आचार्य का पूजन करना चाहिए तथा दोनों समय संध्यावंदन और अग्निहोत्र अनुष्ठान करना चाहिए ॥1॥
 
Aurav said - A householder should worship God, Cow, Brahmin, Siddhagan, elders and Acharya daily and should perform Sandhyavandan and Agnihotra rituals at both the times. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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