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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
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श्लोक 21
श्लोक
3.11.21
शीर्षण्यानि तत: खानि मूर्द्धानं च समालभेत्।
बाहू नाभिं च तोयेन हृदयं चापि संस्पृशेत्॥ २१॥
अनुवाद
तत्पश्चात जल लेकर शिरोदेश में स्थित इन्द्रियों, ललाट, भुजाओं, नाभि और हृदय का स्पर्श करें॥21॥
After that, take water and touch the senses, forehead, arms, navel and heart located in Shirodesh. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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