vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
»
श्लोक 111
श्लोक
3.11.111
कृतपादादिशौचस्तु भुक्त्वा सायं ततो गृही।
गच्छेच्छय्यामस्फुटितामपि दारुमयीं नृप॥ १११॥
अनुवाद
हे नृप! तत्पश्चात गृहस्थ को चाहिए कि वह सायंकाल भोजन करके हाथ-पैर धोकर छिद्ररहित लकड़ी के पलंग पर लेट जाए ॥111॥
O Nripa! Thereafter, the householder should have his evening meal and wash his hands and feet and lie down on a wooden bed without holes. 111॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×