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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
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श्लोक 103
श्लोक
3.11.103
तस्मादनुदिते सूर्ये समुत्थाय महीपते।
उपतिष्ठेन्नरस्सन्ध्यामस्वपंश्च दिनान्तजाम्॥ १०३॥
अनुवाद
अतः हे महीपते! गृहस्थ को सूर्योदय से पहले उठकर संध्यावंदन करना चाहिए तथा संध्यावंदन भी करना चाहिए; सोना नहीं चाहिए॥103॥
So O Mahipate! A householder should wake up before sunrise and do the evening prayers and also do the evening prayers; Don't sleep 103॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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