vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 10: जातकर्म, नामकरण और विवाह-संस्कारकी विधि
»
श्लोक 2
श्लोक
3.10.2
नित्यनैमित्तिका: काम्या: क्रिया: पुंसामशेषत:।
समाख्याहि भृगुश्रेष्ठ सर्वज्ञो ह्यसि मे मत:॥ २॥
अनुवाद
हे भृगुश्रेष्ठ! मैं आपको सर्वज्ञ मानता हूँ। अतः आप मनुष्यों के समस्त दैनिक, नित्य और यौन-क्रियाओं का वर्णन करने की कृपा करें। 2॥
Oh Bhrigu Shrestha! I think that you are omniscient. Therefore, please describe all the daily, routine and sexual activities of human beings. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×