श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 10: जातकर्म, नामकरण और विवाह-संस्कारकी विधि  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.10.15 
वैखानसो वापि भवेत्परिव्राडथ वेच्छया।
पूर्वसंकल्पितं यादृक् तादृक्‍कुर्यान्नराधिप॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अथवा अपनी इच्छानुसार वानप्रस्थ या संन्यास ग्रहण करो। हे राजन! जैसा तुमने पहले निश्चय किया था वैसा ही करो।॥15॥
 
Or take up the life of a Vanaprastha or Sanyas according to your wish. O King! Do as you had resolved earlier. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)