श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 10: जातकर्म, नामकरण और विवाह-संस्कारकी विधि  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.10.14 
ब्रह्मचर्येण वा कालं कुर्यात्संकल्पपूर्वकम्।
गुरोश्शुश्रूषणं कुर्यात्तत्पुत्रादेरथापि वा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अथवा दृढ़ निश्चय के साथ ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए गुरु अथवा गुरुपुत्रों की सेवा और देखभाल करते रहो ॥14॥
 
Or by adopting ethical celibacy with a firm resolve, continue serving and caring for the Guru or the Guru's sons. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)