श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.1.7 
षडेते मनवोऽतीतास्साम्प्रतं तु रवेस्सुत:।
वैवस्वतोऽयं यस्यैतत्सप्तमं वर्ततेऽन्तरम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ये छह मनु पूर्वकाल में हुए हैं। वर्तमान में जो मनु हैं, वे सूर्य के पुत्र वैवस्वत हैं, जिनका सातवाँ मन्वन्तर वर्तमान है ॥7॥
 
These six Manus have existed in the past. At present the Manu is Vaivasvat, the son of the Sun, whose seventh Manvantar is present. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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