श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.1.5 
श्रीपराशर उवाच
अतीतानागतानीह यानि मन्वन्तराणि वै।
तान्यहं भवत: सम्यक्‍कथयामि यथाक्रमम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - जो मन्वन्तर पूर्वकाल में हो चुके हैं और जो भविष्य में होंगे, उन सबका मैं तुम्हें क्रमशः वर्णन करूँगा॥5॥
 
Shri Parashar ji said - I will narrate to you step by step all the Manvantaras that have happened in the past and those that will happen in the future. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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