श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.1.42 
मन्वन्तरेऽत्र सम्प्राप्ते तथा वैवस्वते द्विज।
वामन: कश्यपाद्विष्णुरदित्यां सम्बभूव ह॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
और हे द्विज! इस वैवस्वत-मन्वन्तर को प्राप्त होने पर भगवान विष्णु कश्यपजी के द्वारा अदिति के गर्भ से वामन रूप में प्रकट हुए॥42॥
 
And O Dwija! On attaining this Vaivasvat-Manvantar, Lord Vishnu appeared in the form of Vamana from Aditi's womb through Kashyapji. 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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