श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.1.38 
औत्तमेऽप्यन्तरे देवस्तुषितस्तु पुनस्स वै।
सत्यायामभवत्सत्य: सत्यैस्सह सुरोत्तमै:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उत्तम मन्वन्तर में वे तुषितदेव ही देवताओं में श्रेष्ठ सत्यगण के साथ सत्यस्वरूप से सत्य के उदर से प्रकट हुए ॥38॥
 
Then in the Uttam-Manvantar, that Tushitadev himself appeared from the stomach of Satya in the form of Truth along with the best of the gods, Satyagana. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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