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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन
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श्लोक 37
श्लोक
3.1.37
तत: पुन: स वै देव: प्राप्ते स्वारोचिषेऽन्तरे।
तुषितायां समुत्पन्नो ह्यजितस्तुषितै: सह॥ ३७॥
अनुवाद
तत्पश्चात् स्वारोचिष-मन्वन्तर के उपस्थित होने पर तुषित नामक देवताओं के साथ तुषित से उन मानसदेव श्री अजित का जन्म हुआ ॥37॥
Then, when Swarochisha-Manvantar was present, that Manasdev Shri Ajit was born from Tushita along with the gods named Tushita. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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