श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  3.1.33-34 
इक्ष्वाकुश्च नृगश्चैव धृष्ट: शर्यातिरेव च।
नरिष्यन्तश्च विख्यातो नाभागोऽरिष्ट एव च॥ ३३॥
करूषश्च पृषध्रश्च सुमहाँल्लोकविश्रुत:।
मनोर्वैवस्वतस्यैते नव पुत्रा: सुधार्मिका:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
और वैवस्वत मनु के नौ पुत्र इक्ष्वाकु, नृग, धृष्ट, शर्याति, नरिष्यंत, नाभग, अरिष्ट, करुष और पृषध्र - ये बहुत प्रसिद्ध और धार्मिक नौ पुत्र हैं। 33-34॥
 
And Vaivaswat Manu's nine sons are Ikshvaku, Nrig, Dhrishta, Sharyati, Narishyant, Nabhag, Arishta, Karush and Prishadhra - these are very famous and religious nine sons. 33-34॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd