श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.1.30 
विवस्वतस्सुतो विप्र श्राद्धदेवो महाद्युति:।
मनुस्संवर्तते धीमान् साम्प्रतं सप्तमेऽन्तरे॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे विप्र! इस समय सातवें मन्वन्तर में सूर्य के पुत्र तेजस्वी एवं बुद्धिमान श्राद्धदेवजी मनु हैं ॥30॥
 
Hey Vipra! At this time, in this seventh Manvantara, the son of Surya is the brilliant and intelligent Shraddhadevji Manu. 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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