श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  3.1.3-4 
ध्रुवप्रह्लादचरितं विस्तराच्च त्वयोदितम्।
मन्वन्तराण्यशेषाणि श्रोतुमिच्छाम्यनुक्रमात्॥ ३॥
मन्वन्तराधिपांश्चैव शक्रदेवपुरोगमान्।
भवता कथितानेताञ्छ्रोतुमिच्छाम्यहं गुरो॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आपने ध्रुव और प्रह्लाद की कथा भी विस्तारपूर्वक कही है। अतः हे गुरुवर! अब मैं आपके मुख से सम्पूर्ण मन्वन्तर तथा मन्वन्तरों के अधिपति, इन्द्र आदि देवताओं सहित सभी मनुओं का वर्णन सुनना चाहता हूँ। (कृपया उनका वर्णन करें)॥3-4॥
 
You have also narrated the stories of Dhruva and Prahlad in detail. Therefore, O Guru! Now I want to hear from your mouth the description of the entire Manvantara and all the Manus, the rulers of the Manvantaras including Indra and the Gods. (Please describe them)॥ 3-4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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