श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.1.2 
देवादीनां तथा सृष्टिर्ऋषीणां चापि वर्णिता।
चातुर्वर्ण्यस्य चोत्पत्तिस्तिर्यग्योनिगतस्य च॥ २॥
 
 
अनुवाद
आपने देवताओं और ऋषियों की सृष्टि तथा चातुर्वर्ण्य एवं तिर्यक योनिगत प्राणियों की उत्पत्ति का भी वर्णन किया है ॥2॥
 
You also described the creation of gods and sages and the origin of Chaturvarnya and Tiryak-yonigata creatures. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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