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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन
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श्लोक 14
श्लोक
3.1.14
सुधामानस्तथा सत्या जपाश्चाथ प्रतर्दना:।
वशवर्तिनश्च पञ्चैते गणा द्वादशकास्स्मृता:॥ १४॥
अनुवाद
उस समय सुधाम, सत्य, जप, प्रतर्दन और वश्वर्ति- ये पाँच-पाँच बारह-बारह देवताओं का समूह था।
At that time, Sudham, Satya, Jap, Pratrdan and Vashvarti - these five were the group of twelve gods each. 14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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