श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  » 
 
 
 
 
अध्याय 1:  पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन
 
अध्याय 2:  सावर्णिमनुकी उत्पत्ति तथा आगामी सात मन्वन्तरोंके मनु, मनुपुत्र, देवता, इन्द्र और सप्तर्षियोंका वर्णन
 
अध्याय 3:  चतुर्युगानुसार भिन्न-भिन्न व्यासोंके नाम तथा ब्रह्मज्ञानके माहात्म्यका वर्णन
 
अध्याय 4:  ऋग्वेदकी शाखाओंका विस्तार
 
अध्याय 5:  शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन
 
अध्याय 6:  सामवेदकी शाखा, अठारह पुराण और चौदह विद्याओंके विभागका वर्णन
 
अध्याय 7:  यमगीता
 
अध्याय 8:  विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
 
अध्याय 9:  ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन
 
अध्याय 10:  जातकर्म, नामकरण और विवाह-संस्कारकी विधि
 
अध्याय 11:  गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
 
अध्याय 12:  गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
 
अध्याय 13:  आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार
 
अध्याय 14:  श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार
 
अध्याय 15:  श्राद्ध-विधि
 
अध्याय 16:  श्राद्ध-कर्ममें विहित और अविहित वस्तुओंका विचार
 
अध्याय 17:  नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना
 
अध्याय 18:  मायामोह और असुरोंका संवाद तथा राजा शतधनुकी कथा
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
 
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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