श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र  »  श्लोक 6-8
 
 
श्लोक  2.9.6-8 
आधार: शिशुमारस्य सर्वाध्यक्षो जनार्दन:।
ध्रुवस्य शिशुमारस्तु ध्रुवे भानुर्व्यवस्थित:॥ ६॥
तदाधारं जगच्चेदं सदेवासुरमानुषम्॥ ७॥
येन विप्र विधानेन तन्ममैकमना: शृणु।
विवस्वानष्टभिर्मासैरादायापो रसात्मिका:।
वर्षत्यम्बु ततश्चान्नमन्नादप्यखिलं जगत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भगवान नारायण शिशुमार का आधार हैं। शिशुमार ध्रुव का आश्रय है और सूर्यदेव ध्रुव में स्थित हैं। हे ब्राह्मण! देवता, दानव और मनुष्य सहित यह सम्पूर्ण जगत किस प्रकार सूर्य पर आश्रित है, इसे एकाग्रचित्त होकर सुनो। सूर्य आठ महीने तक अपनी किरणों में छह रसों से युक्त जल ग्रहण करते हैं और फिर चार महीनों में उसे वर्षा के रूप में बरसाते हैं। इसी से अन्न उत्पन्न होता है और अन्न से सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण होता है। 6-8।
 
Lord Narayan is the base of Shishumar. Shishumar is the shelter of Dhruva and Sun God is situated in Dhruva. ​​O Brahmin! How this entire world including gods, demons and humans is dependent on the Sun, listen to it with full concentration. The Sun takes water mixed with six essences in its rays for eight months and then rains it in four months. From this food is produced and from food the entire world is nourished. 6-8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)