Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.9.17: हे महामुनि! आकाशमण्डल के दोनों प्रकार के जल (सम और विषम नक्षत्रों में होने वाली वर्षा) के ये दिव्य स्नान अत्यंत पवित्र हैं और मनुष्यों के पापों के भय को दूर करने वाले हैं। 17॥ | vishnu अध्याय 2.9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे महामुनि! आकाशमण्डल के दोनों प्रकार के जल (सम और विषम नक्षत्रों में होने वाली वर्षा) के ये दिव्य स्नान अत्यंत पवित्र हैं और मनुष्यों के पापों के भय को दूर करने वाले हैं। 17॥
Oh great sage! These divine baths of both the types of water [rainfall in even and odd constellations] of the galaxy are extremely sacred and remove the fear of sins of human beings. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥