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vishnu 2.9.12: और आकाश गंगा से जल एकत्रित करके वे बिना किसी मेघ आदि के अपनी किरणों द्वारा तुरन्त ही पृथ्वी पर उसे बरसा देते हैं ॥12॥   |   vishnu अध्याय 2.9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.9.12 
आकाशगङ्गासलिलं तथादाय गभस्तिमान्।
अनभ्रगतमेवोर्व्यां सद्य: क्षिपति रश्मिभि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
और आकाश गंगा से जल एकत्रित करके वे बिना किसी मेघ आदि के अपनी किरणों द्वारा तुरन्त ही पृथ्वी पर उसे बरसा देते हैं ॥12॥
 
And after collecting the water from the Milky Way Galaxy, they immediately rain it down on the earth through their rays, without any clouds etc. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)