श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.8.97 
यावन्मात्रे प्रदेशे तु मैत्रेयावस्थितो ध्रुव:।
क्षयमायाति तावत्तु भूमेराभूतसम्प्लवात्॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! पृथ्वी से लेकर ध्रुव पर्यन्त सम्पूर्ण क्षेत्र प्रलयकाल में नष्ट हो जाता है ॥97॥
 
O Maitreya! The entire region where the Pole is situated, from the Earth up to that region, gets destroyed during the time of deluge. ॥97॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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