श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.8.96 
ब्रह्महत्याश्वमेधाभ्यां पापपुण्यकृतो विधि:।
आभूतसम्प्लवान‍्तन्तु फलमुक्तं तयोर्द्विज॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज पुरुष! ब्रह्महत्या और अश्वमेध यज्ञ से जो पाप और पुण्य होते हैं, वे प्रलयकाल तक बने रहने वाले कहे गए हैं॥ 96॥
 
O twice born person! The sins and good deeds that are done by killing a brahmin and performing the Ashwamedha Yajna have been said to last till the doomsday.॥ 96॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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