vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
»
श्लोक 92
श्लोक
2.8.92
अष्टाशीतिसहस्राणि मुनीनामूर्ध्वरेतसाम्।
उदक्पन्थानमर्यम्ण: स्थितान्याभूतसम्प्लवम्॥ ९२॥
अनुवाद
प्रलयकाल के अन्त तक सूर्य के उत्तर मार्ग में अस्सी हजार ऊर्ध्वरेता ऋषि निवास करते हैं ॥92॥
Eighty thousand Urdhvareta sages reside in the northern path of the Sun till the end of the Doomsday. 92॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd