श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  2.8.89 
एवमावर्तमानास्ते तिष्ठन्ति नियतव्रता:।
सवितुर्दक्षिणं मार्गं श्रिता ह्याचन्द्रतारकम्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे व्रतधारी महर्षि चन्द्रमा और तारों की स्थिति तक सूर्य के दक्षिणायन पथ में बार-बार आते-जाते रहते हैं ॥89॥
 
In this way, those fasting Maharishis keep coming and going again and again in the southern path of the Sun till the position of the Moon and the stars. 89॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd