श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 83-84
 
 
श्लोक  2.8.83-84 
सुधामा शङ्खपाच्चैव कर्दमस्यात्मजो द्विज।
हिरण्यरोमा चैवान‍्यश्चतुर्थ: केतुमानपि॥ ८३॥
निर्द्वन्द्वा निरभिमाना निस्तन्द्रा निष्परिग्रहा:।
लोकपाला: स्थिता ह्येते लोकालोके चतुर्दिशम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! सुदामा, कर्दमपुत्र शंखपाद, हिरण्योमा और केतुमान - ये चारों द्वंद्वरहित, निर्भय, निश्चिन्त और आसक्तिरहित होकर जगत् के रक्षक पर्वत की चारों दिशाओं में स्थित हैं ॥83-84॥
 
Hey Dwija! Sudhama, Kardam's son Shankhapad, Hiranyoma and Ketuman - these four are free from conflict, fearless, careless and free from attachment, the guardians of the world are situated in the four directions of the mountain. 83-84॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd