श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.8.82 
लोकालोकश्च यश्शैल: प्रागुक्तो भवतो मया।
लोकपालास्तु चत्वारस्तत्र तिष्ठन्ति सुव्रता:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
जिस लोकालोक पर्वत का वर्णन मैंने पहले तुमसे किया है, वह वही है जिस पर चारों पुण्य लोकपाल निवास करते हैं ॥ 82॥
 
The Lokalok mountain that I have described to you earlier is the one on which the four virtuous Lokpalas (guardians of the world) reside. ॥ 82॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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