| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन » श्लोक 81 |
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| | | | श्लोक 2.8.81  | तपस्तपस्यौ मधुमाधवौ च
शुक्र: शुचिश्चायनमुत्तरं स्यात्।
नभोनभस्यौ च इषस्तथोर्ज-
स्सह:सहस्याविति दक्षिणं तत्॥ ८१॥ | | | | | | अनुवाद | | माघ-फाल्गुन, चैत्र-वैशाख, ज्येष्ठ-आषाढ़ के छह महीने उत्तरायण कहलाते हैं और श्रावण-भाद्र, आश्विन-कार्तिक, अगहन-पौष के छह महीने दक्षिणायन कहलाते हैं।॥ 81॥ | | | | The six months of Magha-Phalguna, Chaitra-Vaisakha, Jyestha-Ashadha are called Uttarayan, and the six months of Shravan-Bhadra, Ashwin-Kartik, Agahan-Paush are called Dakshinayan.॥ 81॥ | | ✨ ai-generated | | |
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