श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  2.8.80 
अहोरात्रार्द्धमासास्तु कला: काष्ठा: क्षणास्तथा।
पौर्णमासी तथा ज्ञेया अमावास्या तथैव च।
सिनीवाली कुहूश्चैव राका चानुमतिस्तथा॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
यागादिका समय निश्चित करने के लिए दिन, रात्रि, पक्ष, रंग, समय और क्षण आदि को अच्छी तरह जानना चाहिए। पूर्णमासी 1 दो प्रकार की होती है, राका और अश्मा, तथा अमावस्या 2 दो प्रकार की होती है, सिनीवाली और कुहू ॥80॥
 
To decide the time of Yagadika, one should know well about day, night, aspect, color, time and moment etc. There are two types of Purnamasi 1, Raka and Aishma, and two types of Amavasya 2, Siniwali and Kuhu. 80॥
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