vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
»
श्लोक 73
श्लोक
2.8.73
य: श्वेतस्योत्तर: शैल: शृङ्गवानिति विश्रुत:।
त्रीणि तस्य तु शृङ्गाणि यैरयं शृङ्गवान्स्मृत:॥ ७३॥
अनुवाद
श्वेतवर्ष के उत्तर में जो पर्वत है, जो श्रृंगवन नाम से प्रसिद्ध है, उसमें तीन चोटियाँ हैं, जिसके कारण उसे श्रृंगवन कहा जाता है। 73.
The mountain to the north of Shwetavarsha, known as Shringavan, has three peaks, due to which it is called Shringavan. 73.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×