श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.8.72 
संवत्सरस्तु प्रथमो द्वितीय: परिवत्सर:।
इद्वत्सरस्तृतीयस्तु चतुर्थश्चानुवत्सर:।
वत्सर: पञ्चमश्चात्र कालोऽयं युगसंज्ञित:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
इनमें पहला संवत्सर, दूसरा परिवत्सर, तीसरा इद्वत्सर, चौथा अणुव्रत और पाँचवाँ वत्सर है। इस काल को 'युग' कहते हैं।
 
Among them, the first is Samvatsar, the second is Parivatsar, the third is Idvatsar, the fourth is Anuvratsar and the fifth is Vatsara. This period is known as ‘Yuga’.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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