| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन » श्लोक 71 |
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| | | | श्लोक 2.8.71  | संवत्सरादय: पञ्च चतुर्मासविकल्पिता:।
निश्चय: सर्वकालस्य युगमित्यभिधीयते॥ ७१॥ | | | | | | अनुवाद | | चार प्रकार के मासों (सौर, वर्षा, चान्द्र और नक्षत्र) के अनुसार नाना प्रकार से कल्पित पाँच प्रकार के वर्ष, संवत्सरदि, 'युग' कहलाते हैं। यह युग (मलमासदि) सब प्रकार के काल-निर्णयों का कारण कहा गया है। 71॥ | | | | According to the four types of months [solar, monsoon, lunar and sidereal], the five types of years, Samvatsaradi, which are variously imagined, are called 'Yuga'. This Yuga [Malmasaadi] is said to be the reason for all types of time-decisions. 71॥ | | ✨ ai-generated | | |
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