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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
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श्लोक 62
श्लोक
2.8.62
तस्मात्प्रातस्तनात्कालात्त्रिमुहूर्तस्तु सङ्गव:।
मध्याह्नस्त्रिमुहूर्तस्तु तस्मात्कालात्तु सङ्गवात्॥ ६२॥
अनुवाद
इस प्रातःकालके पश्चात् तीन मुहूर्तका समय ‘संगव’ कहलाता है और संगवकालके पश्चात् तीन मुहूर्तका समय ‘मध्यान’ कहलाता है ॥62॥
The time of three Muhurats after this morning time is called ‘Sangav’ and after the Sangav time, the time of three Muhurats is called ‘Madhyaan’. 62॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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