| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन » श्लोक 60 |
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| | | | श्लोक 2.8.60  | ह्रासवृद्धी त्वहर्भागैर्दिवसानां यथाक्रमम्।
सन्ध्या मुहूर्तमात्रा वै ह्रासवृद्धॺो: समा स्मृता॥ ६०॥ | | | | | | अनुवाद | | दिनों का घटना या बढ़ना क्रमशः प्रातःकाल, मध्याह्न आदि दिन के भागों के घटने-बढ़ने से होता है; किन्तु दिनों के घटने-बढ़ने पर भी संध्याकाल सदैव एक ही भाव से शुभ समय होता है ॥60॥ | | | | The decrease or increase of days is due to the decrease and increase of day parts like morning, afternoon etc. respectively; But despite the increasing and decreasing of days, evening is always an auspicious time with the same feeling. 60॥ | | ✨ ai-generated | | |
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