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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
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श्लोक 57
श्लोक
2.8.57
तस्मान्नोल्लङ्घनं कार्यं सन्ध्योपासनकर्मण:।
स हन्ति सूर्यं सन्ध्याया नोपास्तिं कुरुते तु य:॥ ५७॥
अनुवाद
अतः सन्ध्योपासना-कर्म का कभी उल्लंघन नहीं करना चाहिए। जो मनुष्य संध्यावन्दन नहीं करता, वह भगवान सूर्य को मार डालता है॥57॥
Therefore, one should never violate Sandhyopasana-karma. The man who does not worship the evening kills Lord Surya. 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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