श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.8.56 
तेन सम्प्रेरितं ज्योतिरोङ्कारेणाथ दीप्तिमत्।
दहत्यशेषरक्षांसि मन्देहाख्यान्यघानि वै॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
उस ओंकार की प्रेरणा से अत्यंत प्रकाशित होकर वह प्रकाश मन्देह नामक समस्त पापी राक्षसों को जला देता है ॥56॥
 
Being extremely illuminated by the inspiration of that Omkar, that light burns all the sinful demons named Mandeha. 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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