श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.8.53 
अग्निहोत्रे हूयते या समन्त्रा प्रथमाहुति:।
सूर्यो ज्योति: सहस्रांशुस्तया दीप्यति भास्कर:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
अग्निहोत्र में 'सूर्यो ज्योति:' आदि मंत्र से दी गई पहली आहुति सहस्त्रांशु दीनानाथ को देदीप्यमान बनाती है। 53॥
 
In Agnihotra, the first offering made with the mantra ‘Suryo Jyoti:’ etc., makes Sahasranshu Dinnath resplendent. 53॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd