श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.8.48 
उषा रात्रि: समाख्याता व्युष्टिश्चाप्युच्यते दिनम्।
प्रोच्यते च तथा सन्ध्या उषाव्युष्टॺोर्यदन्तरम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
रात्रि को उषा और दिन को व्युष्टि (प्रातः) कहते हैं; उषा और व्युष्टि के बीच के समय को संध्या कहते हैं॥ 48॥
 
The night is called Usha and the day is called Vyushti (morning); the time between Usha and Vyushti is called Sandhya *॥ 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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