श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.8.43 
एकप्रमाणमेवैष मार्गं याति दिवाकर:।
अहोरात्रेण यो भुङ्‍क्ते समस्ता राशयो द्विज॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! सूर्य को सदैव समान दूरी तय करनी पड़ती है; एक दिन-रात में वह समस्त राशियों को ग्रस लेता है ॥ 43॥
 
O Brahmin, the Sun always has to traverse an equal distance; in one day and night it consumes all the zodiac signs. ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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