श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.8.42 
मन्दाह्नि यस्मिन्नयने शीघ्रा नक्तं तदा गति:।
शीघ्रा निशि यदा चास्य तदा मन्दा दिवा गति:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जिस संक्रान्ति में दिन में सूर्य की गति धीमी होती है, उस संक्रान्ति में रात्रि में उसकी गति तीव्र होती है; और जिस संक्रान्ति में रात्रि में उसकी गति तीव्र होती है, उस संक्रान्ति में दिन में उसकी गति धीमी हो जाती है ॥ 42॥
 
In that solstice where the Sun's speed is slow during the day, it is fast during the night; and in that solstice where it is fast during the night, it becomes slow during the day. ॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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